भाग 9: गुप्तोत्तर
काल और दक्षिण भारत की शक्तियाँ
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वंश/शासक |
मुख्य विवरण और तथ्य |
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हर्षवर्धन (पुष्यभूति) (606–647 ई.) |
उसका
दूसरा नाम शिलादित्य था। दरबारी
कवि बाणभट्ट ने हर्षचरित की रचना की। चीनी
यात्री ह्वेनसांग उसके काल में आया, जिसने अपना यात्रा विवरण सीयूकी में लिखा। हर्ष ने स्वयं प्रियदर्शिका, रत्नावली, और नागानन्द नामक नाटकों की रचना की। |
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पल्लव वंश (कांचीपुरम) |
संस्थापक सिंह विष्णु था। नरसिंहवर्मन
प्रथम इस वंश का सर्वश्रेष्ठ सम्राट
था, जिसने पुलकेशिन द्वितीय को
पराजित किया और वातापीकोंड की उपाधि धारण की। उसने महाबलिपुरम (मामल्लपुरम) नगर बसाया और रथ मंदिरों (मामल्ल शैली/सप्त पैगोडा) का
निर्माण कराया। |
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चालुक्य वंश (वादामी) |
पुलकेशिन द्वितीय (609–642 ई.) इस वंश का प्रतापी शासक था, जिसने उत्तरी भारत के शासक हर्षवर्धन को पराजित किया। |
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राष्ट्रकूट वंश (मान्यखेत) |
संस्थापक दन्तिदुर्ग था। कृष्ण
प्रथम ने एलोरा में ठोस चट्टान को
काटकर कैलाश मंदिर (शिव मंदिर) का निर्माण कराया। ध्रुव ने गुर्जर प्रतिहार राजा
वत्सराज और पाल राजा धर्मपाल दोनों को पराजित किया। अमोघवर्ष ने कन्नड़ भाषा में कविराज मार्ग की रचना की। |
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चोल वंश (तंजावुर) |
संस्थापक विजयालय था, जिसे चोल साम्राज्य का द्वितीय
संस्थापक कहते हैं। राजराज
महान (985–1014 ई.) ने उत्तरी लंका को जीता और
तंजावुर में राजराजेश्वर/बृहदेश्वर शिव
मंदिर का निर्माण कराया। राजेंद्र
प्रथम (1014–1044 ई.) ने संपूर्ण लंका जीती और
गंगा घाटी तक विजय के उपलक्ष्य में गंगईकोंडचोल की उपाधि धारण की। चोल
प्रशासन स्थानीय स्वशासन के लिए प्रसिद्ध था। उत्तरमेरूर
अभिलेख ग्राम स्वशासन निकायों के चुनाव
का विवरण देता है। नटराज शिव की कांस्य मूर्ति चोल कला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण
है। |
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पाल वंश (बंगाल) |
संस्थापक गोपाल था। धर्मपाल ने भागलपुर जिले में विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण कराया था। |
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गुर्जर-प्रतिहार |
इन्हें
अरबों के प्रसार को रोकने के कारण भारत के प्रतिहारी (द्वार रक्षक) कहा गया। इस वंश का प्रतापी शासक मिहिरभोज था, जिसने लम्बे समय (840-890 ई.) तक शासन किया। |
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चंदेल वंश (खजुराहो) |
ये
जजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) में थे। राजा विद्याधर ने कंदारिया महादेव मंदिर (1025–1050 ई.) का निर्माण कराया था, जो खजुराहो का सबसे बड़ा, ऊँचा और कलात्मक मंदिर है। |
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परमार वंश (मालवा) |
संस्थापक उपेंद्र या कृष्णराज था। राजा भोज सबसे लोकप्रिय शासक था। उसने धार में संस्कृत
महाविद्यालय (भोजशाला) की स्थापना की। |
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चौहान वंश |
पृथ्वीराज
तृतीय (रायपिथौरा) को उत्तर भारत का अंतिम हिन्दू सम्राट माना जाता है। उसके
दरबारी कवि चंदबरदाई ने पृथ्वीराज रासो की रचना की। तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.) में पृथ्वीराज विजयी रहा, किंतु तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में मुहम्मद गोरी विजयी हुआ। |
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गहड़वाल वंश |
इस वंश का अंतिम शासक जयचंद्र था, जिसे 1194 ई. में चंदावर के युद्ध में मुहम्मद गोरी ने पराजित
किया |
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